Saturday, 21 October 2017

ज़मीन जल रही है फिर भी चल रहा हूँ मैं फ़िज़ा का वक़्त हैं और फूल फल रहा हूँ मैं हर तरफ आंधिया हैं नफरतो की मैं फिर भी दीपक हूँ प्यार का हिम्म...

Wednesday, 18 October 2017

दीप जला हैं जगमग जगमग, सारी खुशिया सबके दर पर, रात अंधेरी  सांत  स्वरूप में, दीपक किया हैं रौशन हर जग।                         ~ दीपक क...

मोहब्बत never dies.... नफरत dies every second... I love you without knowing how, or when, or from where. I love you simply, without pro...

दीप  जले  हैं  जगमग - जगमग, रौशन हुई हैं समस्त मनुष्य मंडल, खुसी  उल्लास  सभी  हैं  आये, देखो,दीपक जला हैं अम्बर-अम्बर।                ...

Wednesday, 11 October 2017

किस बात का दुख होता है मुझे किस बात की आंशु निकलती हैं जवाब तब मिला जब खुद को जाना फिर सोचा क्या यही परिभासा है मेरे जीवन का मेरे सृजन क...